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मंगला गौरी व्रत पूजा की सम्पूर्ण विधि, सामग्री एवं लाभ

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माँ मंगला गौरी शक्ति, सौभाग्य, समृद्धि, करुणा और मातृत्व की प्रतीक हैं। श्रद्धा और भक्ति से किया गया यह व्रत पारिवारिक सुख, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है। इस व्रत का मुख्य संदेश है—भक्ति, संयम, कृतज्ञता और परिवार के कल्याण की भावना।

मंगला गौरी व्रत पूजा की सम्पूर्ण विधि, सामग्री एवं लाभ

मंगला गौरी व्रत पूजा की सम्पूर्ण विधि, सामग्री एवं लाभ 

परिचय

मंगला गौरी व्रत माता पार्वती के मंगलमयी स्वरूप माँ मंगला गौरी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से श्रावण (सावन) मास के प्रत्येक मंगलवार को किया जाता है।

विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी तथा सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।


मंगला गौरी व्रत का शुभ समय

  • मासश्रावण (सावन)
  • वारप्रत्येक मंगलवार
  • पूजा का समयप्रातः स्नान के बाद अथवा सायंकाल प्रदोष काल में, स्थानीय परंपरा एवं पंचांग के अनुसार।

पूजा सामग्री

  • माँ मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र
  • पूजा चौकी
  • लाल या पीला वस्त्र
  • कलश
  • नारियल
  • आम के पत्ते (यदि उपलब्ध हों)
  • कुमकुम
  • हल्दी
  • अक्षत (चावल)
  • चंदन
  • पुष्प एवं माला
  • पान के पत्ते
  • सुपारी
  • फल
  • मिठाई
  • पंचामृत (वैकल्पिक)
  • घी का दीपक
  • धूपबत्ती
  • कपूर
  • स्वच्छ जल या गंगाजल
  • दक्षिणा

मंगला गौरी व्रत पूजा विधि

1. स्नान करें

प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ अथवा पारंपरिक वस्त्र धारण करें।

2. पूजा स्थल तैयार करें

पूजा चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माँ मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3. कलश स्थापना करें

कलश में स्वच्छ जल भरें। परंपरा के अनुसार आम के पत्ते तथा नारियल स्थापित करें।

4. श्री गणेश पूजन

सर्वप्रथम भगवान श्रीगणेश का पूजन करें और पूजा की निर्विघ्न सम्पन्नता की प्रार्थना करें।

5. माँ मंगला गौरी का पूजन

माता को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प, माला और वस्त्र (यदि अर्पित करना चाहें) समर्पित करें।

6. दीप एवं धूप जलाएँ

घी का दीपक और धूप प्रज्ज्वलित करें।

7. नैवेद्य अर्पित करें

फल, मिठाई, नारियल तथा सात्त्विक प्रसाद अर्पित करें।

8. मंत्र जाप करें

मंगला गौर्यै नमः

या

पार्वत्यै नमः

का 108 बार जप करें।

इसके पश्चात मंगला गौरी व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण या पाठ करें।

9. आरती करें

माँ मंगला गौरी की आरती करें तथा परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।

10. प्रसाद वितरण

पूजा सम्पन्न होने पर प्रसाद सभी को वितरित करें।


मंगला गौरी व्रत के लाभ

हिन्दू धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करने से निम्नलिखित आध्यात्मिक एवं पारंपरिक लाभ माने जाते हैं

  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति।
  • पति की दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम एवं मधुरता।
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि।
  • जीवन की बाधाओं में कमी आने की प्रार्थना।
  • आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच में वृद्धि।
  • माँ पार्वती की कृपा एवं आध्यात्मिक उन्नति।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

माँ मंगला गौरी शक्ति, सौभाग्य, समृद्धि, करुणा और मातृत्व की प्रतीक हैं। श्रद्धा और भक्ति से किया गया यह व्रत पारिवारिक सुख, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है। इस व्रत का मुख्य संदेश हैभक्ति, संयम, कृतज्ञता और परिवार के कल्याण की भावना।


Conclusion | निष्कर्ष

मंगला गौरी व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, सेवा और परिवार के प्रति समर्पण का पावन पर्व है। सच्ची भक्ति और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत माँ मंगला गौरी की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।

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