हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास को अत्यंत पवित्र माना जाता है। हर माह में आने वाली अमावस्या का अपना अलग महत्व होता है। लेकिन कुछ अमावस्याएं विशेष रूप से अधिक प्रभावशाली मानी जाती हैं। माघ मास में आने वाली मौनी अमावस्या भी इन्हीं में से एक है। यह दिन पुण्य अर्जित करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
आइए जानते हैं कि साल 2026 में मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) का व्रत कब रखा जाएगा। इस दिन के शुभ मुहूर्त क्या हैं। साथ ही, इस दिन दान का क्या महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या तिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को अमावस्या कहा जाता है। इस साल यह अमावस्या व्रत रविवार, 18 जनवरी 2026 (Mauni Amavasya 2026 Date) को रखा जाएगा। अमावस्या तिथि का शुरुआत व समापन समय इस प्रकार है-
मौनी अमावस्या पर स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक का समय सबसे शुभ रहता है। इस दिन सुबह 04 बजकर 43 मिनट से 05 बजकर 53 मिनट तक (Mauni Amavasya Shubh Muhurat) स्नान के लिए उत्तम समय रहेगा। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ है।
• मौनी अमावस्या के अवसर पर जरूरतमंदों को काले रंग की वस्तुएं दान करें।
• दान में काले कपड़े, जूते या काले तिल से बनी वस्तुएं दी जा सकती हैं।
• पितरों की शान्ति के लिए प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर स्नान-ध्यान करें।
• मौनी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
• आर्थिक तंगी दूर करने के लिए शाम के समय तुलसी के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
• धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मौन व्रत रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
• मौनी अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शान्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करें।
• पितरों के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं।
हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya Significance) को दान बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। इस दिन किए गए दान का आध्यात्मिक महत्व अधिक है। मौनी अमावस्या पर भोजन, कपड़े, धन और आवश्यक वस्तुओं का दान सबसे ज्यादा फलदायक है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है।
कहा जाता है कि गरीब और जरूरतमंदों को दान करने से पिछले सभी बुरे कर्मों से मुक्ति मिलती है। मौनी अमावस्या का संबंध पितरों से भी बताया जाता है। इस दिन किया गया दान दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करता है। माघ माह में अनाज, कपड़े, तिल और कंबल जैसी वस्तुओं का दान बहुत कल्याणकारक बताया गया है।
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