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आज का काम कल पर न टालें - Story of Bheem and Yudhisthira | Prerak Kahani
समझनी है जिंदगी तो पीछे देखो, जीनी है जिंदगी तो आगे देखो…।

प्रेरक कहानियाँ

आज का काम कल पर न टालें - Story of Bheem and Yudhisthira

धर्मराज युधिष्ठिर अपने न्याय और धर्म के लिए जाने जाते थे। महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद वे धर्मपूर्वक राज्य कर रहे थे और प्रजा बहुत खुश थी। लेकिन एक दिन उनसे भी भूल हो गई। आइये जानते है कैसे भीम न अपने बड़े भाई को उनके द्वारा की गई गलती का एहसास दिलाया।

आज का काम कल पर न टालें - Story of Bheem and Yudhisthira

महाभारत का युद्ध खत्म हो गया था। चक्रवर्ती सम्राट महाराज युधिष्ठिर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए राज्य कर रहे थे। वे अक्सर राज पाठ से जुड़े कार्यों में व्यस्त रहते थे।

एक दिन युधिष्ठिर किसी विषय पर अपने मंत्रिमंडल से चर्चा कर रहे थे की अचानक एक ब्राह्मण अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंचा। दरअसल कुछ दुराचारियों ने उनसे उनकी गाय छीन ली थी, और इसी बात की शिकायत करने वह महाराज के दरबार में पहुंचा था। लेकिन अपने व्यस्त कार्यक्रम के चलते वह ब्राह्मण की बात नहीं सुन पाए।

महाराज युधिष्ठिर ने उस ब्राह्मण से कहा - "आज तो मैं काफी थक गया हूँ, आप कृपया कल सुबह आइएगा, आपकी अवश्य सहायता की जाएगी। " इतना कहकर युधिष्ठिर वहां से चले गए।

वह ब्राह्मण बहुत उम्मीद लेकर महाराज युधिष्ठिर के दरबार पहुंचे थे, लेकिन महराज युधिष्ठिर के इस व्यवहार से उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। जब वे लौट रहे थे तो महाबली भीम की नज़र उनपर पड़ी। महाबली भीम ने ब्राह्मण देव को रोक कर उनसे उदासी का कारण पूछा, तब उन्होंने सारी बातें भीम को बताई। भीम ने सारी बात सुनकर ब्राह्मण को आश्वाशन दिया और कहा की जल्द ही उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।

भीम को अपने बड़े भाई के इस व्यावहार के बारे जानकर बहुत आश्चर्य हुआ। फिर उन्होंने कुछ सोचा और फिर सैनिकों को पुरे नगर में ढोल नगाड़े बजाने का आदेश दे दिया। यह सब देखकर नगरवासियों से भीम से पूछा की आखिर ऐसा कौनसा अवसर है, जो नगाड़े बजाए जा रहे है?

भीम ने कहा- "आपको नहीं पता, महाराज युधिष्ठिर ने काल पर विजय प्राप्त कर ली है और इसी अवसर पर ढोल-नगाड़े बजाये जा रहे है। यह सब सुनकर युधिष्ठिर ने भीम को बुलाकर पूछा- "यह सब क्या है भीम? मैंने काल पर कब विजय प्राप्त की?"

भीम ने कहा, "भ्राता श्री! अभी कुछ समय पहले ही तो आपने ब्राह्मण को यह कहकर लौटा दिया की उनकी समस्या का समाधान आप कल करेंगे, इसका मतलब तो यह ही हुआ न की आपको पता है की कल या भविष्य में आप जीवित रहेंगे, तो मैंने समझा की आपने अवश्य ही अपने काल पर विजय प्राप्त कर ली होगी, तभी तो आपको पता है कल आप इस संसार में मौजूद रहेंगे"

भीम के इन वचनों को सुनकर महाराज युधिष्ठिर को अपनी गलती का एहसास हुआ, और उन्होंने तुरंत ब्राह्मण की सहायता की और आदरपूर्वक उनकी गाय उन्हें दिलवा दी।

महाभारत से जुड़ी इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की कभी भी कार्य को कल पर नहीं टालना चाहिए, कई बार हम आलस के चलते भी कार्य को कल पर टाल देते है, लेकिन यह सही नहीं है। हमें सभी कार्यों को प्राथमिकता देकर आज ही कर लेना चाहिए, क्योंकि कल किसी ने नहीं देखा है।

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