समझनी है जिंदगी तो पीछे देखो, जीनी है जिंदगी तो आगे देखो…।
blog inner pages top

ब्लॉग

चाणक्य नीति के अनुसार इन 5 जगहों पर कभी नहीं रुकना चाहिए!

Download PDF

आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्‍त्री, कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ और मार्गदर्शक थे। उन्हें विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता था। आचार्य चाणक्य ने एक नीति शास्त्र का निर्माण किया है। इस नीति शास्त्र में उन्होंने धन, व्यापर, मित्र, शत्रु, परिवार और जीवन से जुड़े अन्य कई पहलुओं पर चर्चा की है।

चाणक्य नीति के अनुसार इन 5 जगहों पर कभी नहीं रुकना चाहिए!

आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री, कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ और मार्गदर्शक थे। उन्हें विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता था। आचार्य चाणक्य ने एक नीति शास्त्र का निर्माण किया है। इस नीति शास्त्र में उन्होंने धन, व्यापर, मित्र, शत्रु, परिवार और जीवन से जुड़े अन्य कई पहलुओं पर चर्चा की है।

वैसे तो आचार्य चाणक्य की सभी नीतियों ने सदा ही समाज को एक नई दिशा की ओर बढ़ाया है, लेकिन आज इस ब्लॉग में हम आपको ऐसे 5 स्थानों के बारे में बताने जा रहे है, जहां रुकने से आपके जीवन में बहुत सारी परेशानियां आ सकती है। चाणक्य के अनुसार व्यक्ति की तरक्की इस बात पर भी निर्भर करती है की वो कैसे और कहां अपने जीवन का कीमती समय व्यतीत कर रहा है।

आइए जानते है कौनसी है ये 5 जगह जहां व्यक्ति को एक भी दिन नहीं रुकना चाहिए:


जहां मान-सम्मान न मिलें

चाणक्य जी के अनुसार यदि किसी जगह पर व्यक्ति को मान-सम्मान या आदर नहीं मिले तो उसे वह जगह तुरंत त्याग देनी चाहिए। इंसान को अपनी पहचान बनाने में बहुत समय लग जाता है और जिस जगह बात उसके मान-मर्यादा की आ जाए, ऐसी जगह उस व्यक्ति के रहने लायक कभी नहीं हो सकती है। इतना ही मान- प्रतिष्ठा घटाने वाले स्थान पर रहने से उस व्यक्ति की छवि खराब ही होती चली जाती है।


जहां नाते-रिश्तेदार न रहें

चाणक्य नीति के अनुसार ऐसी जगह जहां पर आपका कोई परिवार का सदस्य या रिश्तेदार ना रहता हो उस स्थान को छोड़ देना चाहिए। इसके पीछे का कारण यह है की आवश्यकता पड़ने पर जो सबसे पहले आपके साथ खड़े रहते है वो दोस्त या रिश्तेदार ही होते है। इसलिए आप कहीं भी रहे तो यह सुनिश्चित अवश्य करें की वहां आपके दोस्त या रिश्तेदार है या नहीं।


जहां रोजगार न मिलें

किसी भी व्यक्ति को जीवन जीने के लिए रोजगार कमाने की ज़रूरत होती है, और इसी बात को ध्यान में रखते हुए चाणक्य कहते है की जिस जगह रोजी - रोटी कमाने के साधन न हो वहां से दूर हो जाना ही अच्छा विकल्प है। वर्तमान में जीने और भविष्य को संवारने, दोनों के लिए ही धन की आवश्यकता होती है। इसलिए जिस स्थान पर रोजगार न मिले उस स्थान को त्याग देना चाहिए।


जहां शिक्षा का महत्व न हो

आचार्य चाणक्य कहते हैं की ऐसा स्थान जहां शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता है, वहां रुकना व्यर्थ है। व्यक्ति के जीवन को सभ्य बनाने में पढ़ाई-लिखाई की बहुत अहमियत होती है। चाणक्य नीति के अनुसार किसी भी मनुष्य का जीवन शिक्षा और ज्ञान के बिना अधूरा है।


जहां कुछ सीखने को न मिले

व्यक्ति के लिए जितना ज़रूरी शारीरिक विकास होता है उतना ही ज़रूरी मानसिक विकास भी होता है। वही व्यक्ति बुद्धिमान होता है जो समय के साथ कुछ न कुछ सीखता रहे। इसलिए जिस जगह आपको कुछ सीखने को न मिले उस जगह हो छोड़ देना ही अच्छा होता है अन्यथा आप और लोगों के मुकाबले पीछे रह सकते है।


चाणक्य नीति में बताई जानें वाली सभी बातें जीवन में मार्गदर्शन का काम करती है। इतना ही नहीं, इन चाणक्य नीतियों के बारे में तो यह भी मान्यता बताई जाती है की, जो भी व्यक्ति उनकी इन नीतियों का सही तरीके से पालन करता है, उसे जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

डाउनलोड ऐप

TAGS