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त्यौहार

Makar Sankranti 2026 : कब है मकर संक्रांति? जानें तिथि, पुण्य काल मुहूर्त और विशेष अनुष्ठान!

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मकर संक्रांति एक बहुत ही लोकप्रिय पर्व है। हर साल 12 संक्रांतियां आती हैं। हालांकि इन सभी में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। इस दिन गंगा स्नान को अत्यंत फलदायक माना गया है। दान-पुण्य के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है। देशभर के तीर्थ स्थलों पर इस दिन लाखों भक्तों का जमावड़ा देखने को मिलता है। आमतौर पर यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है।

Makar Sankranti 2026 : कब है मकर संक्रांति? जानें तिथि, पुण्य काल मुहूर्त और विशेष अनुष्ठान!

तो आइए जानते हैं मकर संक्रांति 2026 (Makar Sankranti 2026) तिथि, शुभ मुहूर्त व मुख्य अनुष्ठान-

Makar Sankranti 2026 Tithi : कब है मकर संक्रांति?

मकर संक्रांति उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। इस साल, यह पर्व 14 जनवरी 2026 (makar sankranti 2026 date) को मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य मकर राशि में दोपहर 3:13 बजे प्रवेश करेगा। इसके बाद, पुण्य काल प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान स्नान-दान और सूर्य को अर्घ्य दी जाती हैं।


Makar Sankranti Punya Kaal Muhurat: मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त

मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त

बुधवार, जनवरी 14, 2026

मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त

दोपहर 03:13 PM से शाम 05:45 PM तक

अवधि - 02 घण्टे 32 मिनट

मकर संक्रांति महा पुण्य काल मुहूर्त

दोपहर 03:13 PM से शाम 04:58 PM तक

अवधि - 01 घण्टे 45 मिनट


Makar Sankranti Rituals : मकर संक्रांति मुख्य अनुष्ठान

मकर संक्रांति के दिन देशभर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। जैसे-

1. दान

मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, अनाज और तिल दान किए जाते हैं।

2. सूर्य देव की पूजा

इस दिन भक्त सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित करते हैं। फिर उगते सूरज की पूजा की जाती है। फिर सभी भक्त अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।

3. पवित्र स्नान

इस दिन सूर्योदय के समय पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। मान्यता है कि इस शुभ तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

4. विशेष पकवान

मकर सक्रांति पर घर-घर में खास व्यंजन बनाए जाते हैं। तिल के लड्डू, फीणी, तिलकुटा जैसी पारंपरिक मिठाइयां बांटी जाती हैं।


कैसे मनाया जाता है मकर संक्रांति का त्यौहार?

मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) पूरे भारत में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है। गुजरात और राजस्थान में इस दिन पतंग उड़ाई जाती है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। वही असम में इसे माघ बिहू और बंगाल में पौष पर्व के रूप में मनाया जाता है। सभी जगहों पर यह पर्व फसल, समृद्धि और नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।


Significance of Makar Sankranti : मकर संक्रांति का महत्व

• सनातन धर्म में मकर संक्रांति को एक महत्वपूर्ण त्यौहार माना गया है। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह दिन सर्दियों के खत्म होने और लंबे दिनों की शुरुआत, यानी उत्तरायण का संकेत देता है।

• इस पावान दिन पर लोग गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। मान्यता है कि मकर सक्रांति के दिन ज़रूरतमंदों को दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

• मकर संक्रांति फसल के मौसम का उत्सव है। इसे देशभर के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। कुछ जगह पतंग उड़ाने का उत्सव होता है। तमिलनाडु में इसे चार दिन तक चलने वाला पोंगल उत्सव मनाया जाता है। असम में माघ बिहू और महाराष्ट्र में कई धार्मिक आयोजन होते हैं।

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