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Sawan 2026: सावन कब है? सही तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, व्रत नियम और विशेष उपाय

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सावन, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिन्दू पंचांग का अत्यंत पवित्र और शुभ महीना माना जाता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है।

Sawan 2026: सावन कब है? सही तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, व्रत नियम और विशेष उपाय

सावन 2026 कब शुरू होगा? पूजा मुहूर्त और विशेष उपाय

आइए जानते हैं इस वर्ष सावन (Sawan 2026) कब शुरू होगा, चारों प्रहरों की पूजा का महत्व क्या है और इस पवित्र महीने में किए जाने वाले कुछ विशेष उपाय।


⭐ सावन 2026 की शुरुआत कब होगी?

सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांग परंपराओं (उत्तर भारत, दक्षिण भारत, अमावस्या और पूर्णिमांत पंचांग) के अनुसार सावन प्रारंभ और समाप्ति तिथि में अंतर हो सकता है।


⭐ सावन का महत्व क्या है?

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस माह में श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र तथा "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि तथा मानसिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सावन का धार्मिक महत्व

  • भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सावन का समय श्रेष्ठ माना जाता है।
  • इस महीने में किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
  • कई श्रद्धालु सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
  • अनेक स्थानों पर कांवड़ यात्रा भी इसी महीने आयोजित की जाती है।

⭐ सावन में भगवान शिव को क्या अर्पित करना चाहिए?

सावन में भगवान शिव को गंगाजल, शुद्ध जल, बेलपत्र, भस्म, चंदन, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, फल, मौसमी फल और सात्विक प्रसाद अर्पित करना शुभ माना जाता है।

बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें: बेलपत्र साफ, ताजा और अखंड होना चाहिए।


⭐ सावन 2026 में क्या करें?

  1. भगवान शिव का जलाभिषेक करें:

    प्रतिदिन या विशेष रूप से सोमवार को शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें।

  2. बेलपत्र अर्पित करें:

    शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। स्वच्छ और अखंड बेलपत्र अर्पित करें।

  3. मंत्र-जप करें:
    • ॐ नमः शिवाय
    • महामृत्युंजय मंत्र
  4. शिव चालीसा एवं आरती पढ़ें।
  5. सात्विक भोजन करें:

    कई श्रद्धालु इस माह में सात्विक भोजन अपनाते हैं और संयम का पालन करते हैं।

  6. दान करें:

    अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान कर सकते हैं।


⭐ सावन में क्या न करें?

  • क्रोध, कटु वचन और अनावश्यक विवाद से बचें।
  • नशे और अन्य हानिकारक आदतों से दूर रहें।
  • किसी का अपमान या अनादर न करें।
  • असत्य और छल-कपट से बचने का प्रयास करें।

⭐ सावन में कौन-से विशेष उपाय किए जा सकते हैं?

सावन में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करना, सोमवार को बेलपत्र चढ़ाना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना, गरीबों को अन्न एवं वस्त्र दान करना, मंदिर में दीपक जलाना तथा शिव परिवार की पूजा करना शुभ माना जाता है।

इन उपायों को श्रद्धा, आस्था और सदाचार के साथ करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।


⭐ सावन में रुद्राक्ष पहनने का शुभ समय

  • सावन के महीने में सोमवार का दिन रुद्राक्ष धारण करने के लिए विशेष शुभ माना जाता है।
  • प्रातः स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा के बाद रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है।
  • "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए रुद्राक्ष पहनना शुभ माना जाता है।

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रुद्राक्ष पहनने के स्थान

  • गले में माला के रूप में।
  • हाथ में कंगन के रूप में।
  • परंपरा के अनुसार शरीर के अन्य उचित स्थानों पर।

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⭐ कौन सा रुद्राक्ष सावन में धारण किया जाता है?

  • 5 मुखी रुद्राक्ष: सबसे सामान्य रुद्राक्ष माना जाता है और कई लोग इसे नियमित धारण करते हैं।
  • 6 मुखी रुद्राक्ष: ज्ञान और एकाग्रता से जुड़ा माना जाता है।
  • 7 मुखी रुद्राक्ष: समृद्धि और संतुलन से संबंधित माना जाता है।
  • 11 मुखी रुद्राक्ष: आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।
  • 12 मुखी रुद्राक्ष: सूर्य तत्व से संबंधित माना जाता है।

नोट: रुद्राक्ष और पूजा से जुड़े लाभ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं।

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