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Basant Panchami 2024 Vivah Muhurat: बसंत पंचमी 2024 के दिन इन शुभ मुहूर्त पर करें मांगलिक कार्य

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बसंत पंचमी, जिसे वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा (Vasant Panchami or Saraswati Puja) भी कहा जाता है। यह पर्व वसंत के आगमन का प्रतिनिधित्व करने वाला एक शुभ हिंदू त्योहार है। इस त्यौहार पर विशेष रूप से हम संगीत, ज्ञान, कला और शिक्षा की देवी सरस्वती जी की पूजा करते है।

Basant Panchami 2024 Vivah Muhurat: बसंत पंचमी 2024 के दिन इन शुभ मुहूर्त पर करें मांगलिक कार्य

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बसंत पंचमी, माघ शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इसी कारण से इस दिन देवी सरस्वती की विधिवत पूजा करने की परंपरा है।

वहीं, इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। शास्त्रों के मुताबिक, बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन शुभ और मांगलिक कार्य करना अनुकूल माना जाता है। जानिए बसंत पंचमी पर किए जाने वाले शुभ कार्य जिनमें विवाह, (basant panchami 2024 vivah muhurat) मुंडन, गृह प्रवेश आदि शामिल है।

Basant Panchami 2024 Vivah Muhurat: बसंत पंचमी 2024 मंगल कार्य मुहूर्त

Vivah Muhurat | विवाह मुहूर्त

बसंत पंचमी एक ऐसा त्यौहार है जिसमें कोई भी शुभ कार्य बिना शुभ मुहूर्त देखे किया जा सकता है। इसका एक कारण यह है कि इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। ऐसे में बसंत पंचमी कि पावन तिथि पर शादी, सगाई, तिलक या रिश्तों तय करना अत्याधिक शुभ माना जाता है। यह मुहूर्त 13 फरवरी सुबह 7:20 बजे से प्रारंभ होगा और 14 फरवरी को सुबह 7:20 बजे तक रहेगा।


Mundan Muhurat | मुंडन मुहूर्त

विवाह के साथ ही बसंत पंचमी का यह दिन मुंडन और जनेऊ आदि मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। इस दिन मुंडन सम्पन्न करने से सुखद फल मिलता है। इसके साथ ही वसंत पंचमी के दिन बच्चे को पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। माना जाता है कि इससे बच्चे की बौद्धिक विकास में वृद्धि होती है।


Grah Pravesh Muhurat | गृह प्रवेश मुहूर्त

बसंत पंचमी का दिन गृह प्रवेश के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह 7:15 बजे से लेकर 10:28 बजे तक सबसे सर्वश्रेष्ट्र मुहूर्त है। हालाँकि, बसंत पंचमी का पूरा दिन ही शुभ होता है, जिसके चलते गृह प्रवेश किसी भी समय पर किया जा सकता है।

Significance of Basant Panchami | बसंत पंचमी का ज्योतिषीय महत्व

• वसंत पंचमी पर किसी ज्योतिषी द्वारा की गई सरस्वती पूजा और वामतंत्र से चंद्रमा, बृहस्पति, शुक्र और बुध के अशुभ प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं।

• चंद्रमा, बुध, बृहस्पति और शुक्र की महादशा और अंतर्दशा का अनुभव करने वाले लोगों के लिए सरस्वती पूजा और दान विशेष रूप से फायदेमंद है।

• जो लोग अपनी कुंडली में चंद्रमा, बुध, बृहस्पति और शुक्र के अशुभ प्रभाव का सामना कर रहे हैं, उन्हें किसी प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषी से परामर्श लेने के बाद सरस्वती पूजा करनी चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Dharmsaar इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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