चैत्र मास की अमावस्या का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। इस साल शनिवार के दिन आने के कारण इस तिथि को 'शनि अमावस्या' के नाम से जाना जाएगा। इस शनिचरी अमावस्या के दिन 2025 का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है, जिससे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। अमावस्या, सूर्य ग्रहण और शनि के गोचर के एक साथ होने का प्रभाव आपकी कुंडली पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आप यहां दी गई बातों का विशेष ध्यान रखें, नहीं तो अशुभ प्रभाव झेलने पड़ सकते है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल, शनिवार 29 मार्च 2025 (Surya Grahan 2025 Kab Hai) को शनिचरी अमावस्या पड़ेगी। इस दिन न केवल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा बल्कि न्याय के देवता, भगवान शनिदेव लगभग ढाई वर्षों के बाद कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश करेंगे। कुछ विशेष ज्योतिषियों के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, ऐसे में इस दिन सूतक मान्य नहीं होगा।
हालांकि, इस महासंयोग के दौरान कई राशि के जातकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही कुछ कार्यो को करने से खास तौर पर बचना चाहिए। तो आइए जानते है-
1. शनिश्चरी अमावस्या पर नकारात्मक सोच, गुस्सा और झगड़े से बचना चाहिए।
2. चैत्र अमावस्या के दिन तामसिक भोजन और मांस-मदिरा का सेवन न करें।
3. शनिश्चरी अमावस्या किसी से वाद-विवाद न करें और शांति एवं धैर्य के साथ सभी परेशानियों का सामना करें।
4. अमावस्या के दिन जानवरों, विशेष रूप से कुत्ते और कौवे को परेशान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव आपसे क्रोधित हो सकते हैं।
5. शनिश्चरी अमावस्या के दिन बाल काटने, नाखून काटने और दाढ़ी बनाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह आपकी कुंडली में अशुभ फल प्रदान कर सकते है।
6. अमावस्या या सूर्य ग्रहण के दिन किसी भी प्रकार के शुभ कार्य जैसे कि नया व्यापार शुरू करना, शादी, मकान खरीदना या नया वाहन खरीदना, टाल देना चाहिए।
• सूर्य ग्रहण दोष से बचने के लिए, आप सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं।
• भगवान सूर्यदेव के विशेष मंत्र "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" का जाप करें।
• शनि मंदिर में भगवान शनिदेव को सरसों के तेल में काले तिल मिलकार अर्पित करें।
• शनिश्चरी अमावस्या के दिन मंदिर में शमी या पीपल पौधा लगाएं और हर शनिवार इसके पास दीया जलाएं।
• अमावस्या के दिन दान धर्म का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब और नेत्रहीन लोगों को ज़रूरत की वस्तुएं दान करें।
(यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. Dharmsaar इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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