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Birth Story of Lord Hanuman | हनुमान जी के जन्म के पीछे की पौराणिक कथा

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महाबली हनुमान के नाम लेने से ही सभी कष्ट दूर हो जाते है। संकटमोचन हनुमान का सुमिरन करने से न सिर्फ भय, बल्कि सभी प्रकार के संकट भी छू-मंतर हो जाते है। बजरंगबली की महिमा से तो हम सभी भली-भांति परिचित है, लेकिन क्या आप हनुमान जी के जन्म के पीछे की पौराणिक कथा जानते है?

Birth Story of Lord Hanuman | हनुमान जी के जन्म के पीछे की पौराणिक कथा

हनुमान जी भगवान शिव के 11 वें रुद्र के रूप में जाने जाते है। आपको बता दें, रामचरितमानस में बजरंगबली के जन्म के बारे में वर्णन किया गया है। माना जाता है की हनुमान जी का जन्म ऋषियों-मुनियों द्वारा दिए गए वरदान से हुआ था, ऐसे में आइये विस्तार से जानते है हनुमान जी के धरती पर अवतरित होने की कथा।


ऋषियों द्वारा वरदान प्राप्ति

पवनसुत हनुमान का जन्म मंगलवार के दिन चैत्र माह की पूर्णिमा को हुआ था। हनुमान जी के पिता का नाम वानरराज केसरी था, वहीं माता का नाम अंजनी था। वेद पुराणों में ऐसा बताया जाता है की जब एक बार वानरराज केसरी प्रभास नामक तीर्थ स्थान पर गए, तब उन्होंने देखा की वहां समुद्र के किनारे बैठ कुछ ऋषि गण पूजन कर रहे है।

वे सभी शांति से पूजा-पाठ कर ही रहे थे, की इतनी देर में वहां एक विशाल हाथी आ पहुंचा। वह हाथी उपद्रव मचाने लगा जिसके कारण ऋषियों के पूजा में खलल पड़ गया। राजा केसरी पर्वत पर बैठकर यह पूरा दृश्य देख रहे थे और यह देखकर वह तुरंत ऋषियों की मदद के लिए वहां पहुंचे। वानरराज ने उस उपद्रवी हाथी के दांत तोड़ कर उसे मौत के घाट उतार दिया। जिसके बाद वहां मौजूद समस्त ऋषि गण वानरराज केसरी से बहुत अधिक प्रसन्न हुए। उनके कार्य से प्रसन्न होकर ऋषियों ने उन्हें रूप बदलने वाले, वायु के समान तेज और बुद्धिवान पुत्र होने का वरदान दिया।


भगवान शिव रूप में लिया था जन्म

एक और कथा के अनुसार बताया जाता है की जब माता अंजनी सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए रुकी तो अचानक से बहुत तेज हवा चलने लगी। जब माता अंजनी ने अपने आस पास देखा तो उन्हें अहसास हुआ की यह सामान्य हवा नहीं है बल्कि कोई अपनी मायावी शक्तियों से हवा को उनकी ओर प्रवाहित कर रहा है। उन्होंने यह पता लगाने के लिए अपने चारों ओर देखा पर उन्हें वहां कोई भी नज़र नहीं आया, इसके बाद माता अंजनी क्रोधित हो गयी और उन्होंने ऊंचे स्वर में कहा की आखिर ऐसा कौन व्यक्ति है जो एक पतिव्रता स्त्री का अपमान करने का दुस्साहस कर रहा है?

उनके यह कहने के बाद वहां पवन देव प्रकट हुए और माता अंजनी से क्षमा मांगने लगे। पवन देव ने कहा- "मुझे क्षमा कर दीजिये, लेकिन आपके पति को ऋषि गणों ने मेरे समान पुत्र होने का वरदान दिया था इसी कारण मुझे यहां प्रकट होना पड़ा। मेरे अंश के माध्यम से अब आपको एक पराक्रमी और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी। मेरे स्पर्श से भगवान रूद्र बालक के रूप में प्रविष्ट हुए है जो की आपके पुत्र के रूप में प्रकट होंगे।"

इसी प्रकार भगवान शिव के रूद्र अवतार ने माता अंजनी के गर्भ से जन्म लिया और यही कारण है की हनुमान जी को अंजनी पुत्र और केसरी नंदन के नाम से भी जाना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Dharmsaar इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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