भारत में कई लोकप्रिय मंदिरों का उल्लेख है। इसी सूची में भारत का प्रसिद्ध बिड़ला मंदिर भी शामिल हैं। यह बिरला मंदिर देश के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं और हर एक की अपनी खास पहचान है। बता दें कि देश के जाने-माने उद्योगपति बिड़ला परिवार ने करवाया था। सफ़ेद संगमरमर से बने ये मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्त्व रखते हैं, बल्कि शानदार वास्तुकला का भी बेहतरीन उदाहरण हैं।
तो आइए जानते है, भारत के किन-किन राज्यों में बिड़ला मंदिर (Birla Mandir in India) स्थित हैं और हर एक की क्या खासियत है।
बता दें की बिड़ला मंदिर (about birla mandir) मुख्य रूप से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा को समर्पित हैं। वही कुछ मंदिरों में राधा-कृष्ण और भगवान शिव की मनमोहक मूर्तियां भी विराजमान है। ग्वालियर का बिड़ला मंदिर भी खास है। यह मंदिर देवी सरस्वती को समर्पित है, जो ज्ञान की देवी मानी जाती हैं। पटना के मंदिर की बात करें तो वहां भगवान हनुमान के साथ कई अन्य देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
यह लक्ष्मी नारायण मंदिर, दिल्ली के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। इस मंदिर का निर्माण 1939 में इंडस्ट्रियलिस्ट श्री जे.के. बिड़ला द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर लक्ष्मी देवी (समृद्धि की देवी) और नारायण भगवान (जगत के पालनहार) को समर्पित है। इस भव्य मंदिर का उद्घाटन महात्मा गांधी ने इस शर्त पर किया था कि सभी जातियों के लोगों को मंदिर में प्रवेश मिलेगा।
दर्शन समय -
सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक
वास्तुकला -
सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर से बने इस मंदिर में उड़िया शैली का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता हैं।
बिड़ला परिवार ने 1976 में हैदराबाद में बिड़ला मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर और देवी पद्मावती की पूजा की जाती हैं। शाम के समय, भगवान वेंकटेश्वर की विशाल ग्रेनाइट मूर्ति और मंदिर की जगमगाती रोशनी का दृश्य बहुत ही आकर्षक होता है। यह दृश्य रात में और भी अद्भुत दिखाई पड़ता है।
दर्शन समय-
समय - सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
शाम - दोपहर 3:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
वास्तुकला -
मंदिर में उड़िया और दक्षिण भारतीय शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। वही मंदिर के 'मुख मंडपम' में संगमरमर की उत्कृष्ट नक्काशी की गई है।
कोलकाता में स्थित इस बिरला मंदिर में राधा कृष्ण की मनमोहक मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर के बाएं गुंबद पर देवी दुर्गा और दाएं गुंबद पर देवी शक्ति की मूर्तियाँ स्थापित हैं। यहां की नक्काशी में भगवद गीता के चित्रण को देख सकते हैं। बता दें की इस मंदिर की स्थापना 1996 में कि गई थी और तब से यह बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
दर्शन समय-
सुबह - सुबह 5:30 से 11:00 बजे तक
शाम - शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
वास्तुकला-
मंदिर की शैली आधुनिक और समकालीन दोनों तत्वों का अद्भुत सामंजस्य पेश करती है। वही मंदिर की संरचना भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर से मिलती-जुलती है।
बिड़ला मंदिर सफेद संगमरमर से बना एक सुंदर और भव्य मंदिर है। यह मंदिर 1952 में स्वर्गीय श्री जुगल किशोर बिड़ला ने बनवाया था। यह मंदिर अन्य प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार से बहुत पहले बनकर तैयार हो चुका था। यही कारण है की यह कुरुक्षेत्र के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में से एक है।
दर्शन समय -
सुबह 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक
वास्तुकला -
बिड़ला परिवार द्वारा निर्मित अन्य मंदिरों की तरह, यह भी सफेद संगमरमर से बने अपनी शानदार वास्तुकला का प्रतीक है।
शहाड़ स्थित बिड़ला मंदिर भगवान पांडुरंग (विठोबा) और देवी रुक्मिणी को समर्पित एक प्राचीन पत्थर का हिंदू मंदिर है। यह मंदिर महाराष्ट्र के कल्याण के पास, NH 61 पर स्थित है। मंदिर अपनी प्राचीन संरचना, शांत वातावरण और बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए जाना जाता है। मंदिर के द्वार पर, दोनों ओर सुन्दर पत्थर से तराशे गए दो विशाल हाथी दिखाई देते हैं।
दर्शन समय -
सुबह 5:00 बजे और रात 9:00 बजे तक
वास्तुकला -
मंदिर की नक्काशी में विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं की सुंदर और प्रभावशाली वास्तुकला देखने को मिलती है।
1959 में निर्मित बिड़ला मंदिर बिट्स, पिलानी में स्थित है। यह बीसवीं सदी का एक श्वेत संगमरमर का अद्भुत उदाहरण है। मंदिर 25,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है और देवी सरस्वती को समर्पित है। इस मंदिर को लेकर एक खास बात यह भी है ये 70 स्तंभों पर खड़ा है।
दर्शन समय-
सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
वास्तुकला-
मंदिर की संरचना में भारतीय-आर्यन वास्तुकला के सभी प्रमुख तत्व देखने को मिलते हैं।
इस सूची में अगला नाम भोपाल स्थित बिड़ला मंदिर का है। यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर अरेरा हिल्स की चोटी पर स्थित है और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। बाकी बिड़ला मंदिरों से अलग यह मंदिर रेतीली पीली रंगत और चारों ओर की हरियाली आपको मंत्रमुग्ध कर देती है। मुख्य मंदिर में देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्तियां हैं। वहीं, दूसरे मंदिर में देवी पार्वती और भगवान शिव की सुन्दर मूर्तियां विराजमान हैं।
दर्शन समय-
सुबह - 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
शाम - 3:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
वास्तुकला -
यह अपनी पारंपरिक हिंदू मंदिर वास्तुकला और आधुनिक तकनीकों के बेहतरीन मिश्रण के लिए प्रसिद्ध है।
जयपुर का बिड़ला मंदिर मोती डूंगरी किले के नीचे स्थित है। पिछले कई सालों यह मंदिर जयपुर में टूरिस्ट को आकर्षित करता हुआ आया है। इसका निर्माण 1988 में हुआ था। यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। यही कारण है कि इसे 'लक्ष्मी नारायण मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की दीवारों पर भगवद गीता के कोट्स और हिंदू धर्म के प्रतीकों की खूबसूरत नक्काशी देखने को मिलती है।
दर्शन समय-
सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
वास्तुकला-
यह मंदिर पारंपरिक शैली से अलग, आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वाराणसी स्थित बिड़ला मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है। वैसे तो भारत की आज़ादी से पहले 1931 में इसकी आधारशिला रखी गई थी। लेकिन मंदिर का निर्माण पूरा होने में लगभग तीन दशक लगे। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और मूल काशी विश्वनाथ मंदिर का ही एक प्रतिबिंब है। वही इसका घुमावदार शिखर 252 फीट ऊँचा है।
दर्शन समय-
समय - सुबह 4:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
दोपहर - 1:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
वास्तुकला-
इस मंदिर में पारंपरिक और आधुनिक शैलियों का मिलाजुला स्वरुप देखने को मिलता है।
ओडिशा का ब्रजराजनगर शहर कोयला खदानों और कागज़ मिल्स के लिए विख्यात है। इस छोटे से शहर का एक और आकर्षण है बिड़ला समूह द्वारा निर्मित बिड़ला मंदिर। यह मंदिर औद्योगिक क्षेत्र में शांति का अनुभव कराता है और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
दर्शन समय-
समय - सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
दोपहर - 03:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
वास्तुकला-
मंदिर परिसर की वास्तुकला पारंपरिक और समकालीन डिजाइन का बेहतरीन मिश्रण है। संगमरमर की मूर्तियाँ और रंगीन कांच की खिड़कियां विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
भारत में स्थित बिड़ला मंदिर (List of Famous Birla Temples) देश के विभिन्न शहरों में मौजूद हैं। यह सभी मंदिर अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं। हर मंदिर की शैली में पारंपरिक और आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। ऐसे में यह कहा जा सकता है की ये मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि सालों से पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।